एक वाक्य में: बाज़ार में साफ़ डिस्काउंट हो तो कतार में लगिए, और फ़र्क़ मामूली हो तो सीधे बेच दीजिए। प्रोटोकॉल से निकासी अपने हिसाब-किताब के अनुपात से होती है, चाहे उस दिन बाज़ार भाव जैसा भी हो, पर उसमें इंतज़ार है। बेचने पर ETH तुरंत मिल जाता है, क़ीमत उस पल का फ़र्क़ सहना है।
असली तुलना यह है कि थोड़ा ज़्यादा पाने के लिए आपका पैसा कितने दिन बँधा रहेगा।
अप्रैल 2023 के इथेरियम (Ethereum) अपग्रेड से पहले स्टेकिंग निकासी चालू ही नहीं थी, इसलिए तब stETH को प्रोटोकॉल से वापस ETH में नहीं बदला जा सकता था। अपग्रेड के बाद Lido ने भी प्रोटोकॉल के भीतर निकासी चालू कर दी, और अब stETH सीधे प्रोटोकॉल को देकर उसके हिसाब वाले अनुपात से ETH वापस लिया जा सकता है।
पहले जवाब: किस हालत में कौन सा रास्ता
| आपकी स्थिति | सुझाव | क्यों |
|---|---|---|
| बाज़ार भाव निकासी अनुपात से साफ़ नीचे, और यह पैसा कुछ महीने नहीं चाहिए | कतार में लगिए | फ़र्क़ मुफ़्त में मिल रहा है, लागत सिर्फ़ इंतज़ार |
| फ़र्क़ इतना कम कि फ़ीस के बराबर है | सीधे बेचिए | बचा हुआ समय उस थोड़े फ़र्क़ से ज़्यादा क़ीमती है |
| पैसा जल्दी चाहिए या पोज़ीशन बंद करनी है | सीधे बेचिए | कतार बीच में रद्द नहीं होती |
| टोकन किसी उधारी प्रोटोकॉल में गिरवी है और लिक्विडेशन पास है | पहले कुछ हिस्सा बेचकर क़र्ज़ घटाइए | कतार तात्कालिक ख़तरे में काम नहीं आती |
| रक़म बड़ी है और बाज़ार की गहराई कम | दोनों रास्ते मिलाकर चलिए | बड़ा ऑर्डर ख़ुद भाव बिगाड़ देता है |
| बाज़ार भाव निकासी अनुपात से ऊपर (प्रीमियम) | सीधे बेचिए | ऐसे में कतार में लगने से कम मिलेगा |
आख़िरी पंक्ति का तर्क यह है: जब प्रवेश की कतार लंबी हो, तो तुरंत stETH चाहने वाले थोड़ा ज़्यादा देने को तैयार हो सकते हैं, और बाज़ार भाव निकासी अनुपात से ऊपर चला जाता है। तब कतार में लगने से वह प्रीमियम नहीं मिलता।
दोनों रास्ते असल में अलग-अलग काम करते हैं
निकासी का मतलब है कि कोई वैलिडेटर सचमुच नेटवर्क छोड़ता है और स्टेक किया ETH वापस आता है। बेचने का मतलब है कि वह टोकन किसी और के हाथ चला जाता है, और स्टेकिंग की कुल रक़म में एक ETH भी नहीं घटता।
आप निकासी की रिक्वेस्ट भेजते हैं तो प्रोटोकॉल पहले अपना बफ़र देखता है, जिसमें नई जमा रक़म, वैलिडेटर की कमाई और प्रायोरिटी फ़ीस इकट्ठा होती है। उतने से काम चल जाए तो वहीं से भुगतान हो जाता है। न चले तो वैलिडेटर बाहर निकालने पड़ते हैं, और तब कंसेंसस लेयर की कतार शुरू होती है।
बेचना इससे कहीं सीधा है। आप किसी एक्सचेंज या ऑन-चेन पूल में ऑर्डर लगाते हैं, कोई ETH देकर आपका टोकन ले लेता है। प्रोटोकॉल के लिए कुछ नहीं बदला। इसलिए बेचने पर कोई कतार नहीं होती — बस यह देखना होता है कि इस वक़्त कोई ठीक भाव पर लेने को तैयार है या नहीं।
बेचने की लागत सिर्फ़ भाव का फ़र्क़ नहीं है
चार परतें होती हैं, और चारों गिननी पड़ती हैं।
- भाव का फ़र्क़। बाज़ार भाव और निकासी अनुपात के बीच का अंतर।
- स्लिपेज। आपका अपना ऑर्डर भाव बिगाड़ देता है। छोटी रक़म पर नज़रअंदाज़ किया जा सकता है, बड़ी पर यह परत भाव के फ़र्क़ से भी महँगी पड़ सकती है।
- ट्रेडिंग फ़ीस। ऑन-चेन पूल एक परत लेता है, एक्सचेंज अपनी।
- चेन की फ़ीस। ऑन-चेन करें तो दो लेन-देन लगते हैं, एक मंज़ूरी का और एक अदला-बदली का। छोटी रक़म पर इसका अनुपात डरावना हो जाता है।
दूसरी परत को कम मत आँकिए। ऑन-चेन पूल का भाव उसमें पड़े स्टॉक से तय होता है, इसलिए आप जितना बड़ा ऑर्डर डालेंगे, पिछला हिस्सा उतने ही ख़राब भाव पर जाएगा। भेजने से पहले इंटरफ़ेस "कितना मिलेगा" दिखा देता है; वही देखकर तय कीजिए।
बड़ी रक़म एक साथ मत डालिए। ऑर्डर तोड़कर, समय बाँटकर, या कुछ हिस्सा कतार में और कुछ बाज़ार में — यह अक्सर एक ही झटके में पूरी गहराई खा जाने से सस्ता पड़ता है — डालने से पहले इंटरफ़ेस पर "कितना मिलेगा" दोनों तरह देख लीजिए।
इंतज़ार और फ़र्क़ को एक ही इकाई में लाइए
तरीक़ा यह है कि फ़र्क़ को सालाना दर में बदल दीजिए: (निकासी अनुपात ÷ बाज़ार भाव) का 365/इंतज़ार-के-दिन वाँ घात, फिर एक घटा दीजिए। जो प्रतिशत आए, वही इस बात का असल जवाब है कि इंतज़ार करना फ़ायदे का सौदा है या नहीं।
फ़ॉर्मूले में जो तीन आँकड़े चाहिए, वे सब मुफ़्त सार्वजनिक पेजों पर हैं, और लॉगिन या वॉलेट जोड़ने की ज़रूरत नहीं। निकासी अनुपात और बाज़ार भाव एक ही जगह मिल जाते हैं: Lido का निकासी पेज खोलिए, ऊपर दो विकल्प साथ-साथ हैं — Use Lido यानी कतार में लगना, और Use DEX यानी अभी बाज़ार में बेच देना। वही रक़म डालिए तो दोनों अलग-अलग बता देंगे कि हाथ में कितना ETH आएगा और कितना समय लगेगा। इंतज़ार के दिन के लिए validatorqueue.com पर Exit Queue का ETH आँकड़ा लीजिए (ऊपर वाला Entry Queue नहीं) और कतार टूल में डाल दीजिए।
मान लीजिए प्रोटोकॉल की तरफ़ 1 stETH से 1 ETH मिलता है, बाज़ार 0.985 दे रहा है, और अनुमान 20 दिन का है। फ़र्क़ 1.5% हुआ। 1 ÷ 0.985 = 1.01523, इसका 365/20 = 18.25 वाँ घात, फिर एक घटाइए, तो लगभग 32% सालाना आता है।
| फ़र्क़ | 10 दिन | 20 दिन | 40 दिन | 60 दिन |
|---|---|---|---|---|
| 0.3% | लगभग 11.6% | लगभग 5.6% | लगभग 2.8% | लगभग 1.8% |
| 1.0% | लगभग 44% | लगभग 20% | लगभग 9.6% | लगभग 6.3% |
| 2.0% | लगभग 109% | लगभग 45% | लगभग 20% | लगभग 13% |
| 5.0% | लगभग 550% | लगभग 155% | लगभग 60% | लगभग 37% |
इस तालिका में संख्याएँ याद रखने की ज़रूरत नहीं। ढलान देखिए: फ़र्क़ वही रहे और इंतज़ार दोगुना हो जाए, तो सालाना दर लगभग आधी रह जाती है। यानी फ़ैसला अक्सर डिस्काउंट की गहराई से नहीं, कतार की लंबाई से तय होता है।
तीन बातें जिनसे हिसाब ग़लत बैठता है
एक — रिक्वेस्ट भेजते ही इनाम मिलना बंद
जिस पल टोकन निकासी की कतार में लॉक होता है, उसी पल से वह आपके लिए नया स्टेकिंग इनाम नहीं बनाता। अगर उस समय सालाना दर तीन प्रतिशत के आसपास हो, तो 30 दिन इंतज़ार करने का मतलब लगभग 0.25% इनाम छोड़ना है। ऊपर निकले फ़र्क़ में से यह घटाइए, तभी असल कमाई निकलेगी।
दो — एक रिक्वेस्ट की सीमा
Lido के निकासी-कतार स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के दस्तावेज़ के अनुसार एक रिक्वेस्ट कम से कम 100 wei और ज़्यादा से ज़्यादा 1,000 stETH की हो सकती है। इससे ज़्यादा हो तो कई रिक्वेस्ट में तोड़नी पड़ती है। तोड़ने से कतार में आगे जगह नहीं मिलती, पर चेन की फ़ीस कई बार देनी पड़ती है।
तीन — Lido wstETH को सीधे स्वीकार करता है
Lido के निकासी कॉन्ट्रैक्ट में stETH और wstETH दोनों सीधे भेजे जा सकते हैं। अगर आपके पास wstETH है (दूसरी लेयर से लौटा हुआ या किसी DeFi प्रोटोकॉल से मिला), तो अनुरोध के दौरान कॉन्ट्रैक्ट उसे अपने-आप stETH में बदल देता है; पहले अलग से बदलना ज़रूरी नहीं। पहली बार टोकन की अनुमति और निकासी अनुरोध अलग हस्ताक्षर माँग सकते हैं, जो मौजूदा अनुमति और इंटरफ़ेस में Permit के इस्तेमाल पर निर्भर है। दोनों का फ़र्क़ अलग नोट में लिखा है।
और एक बात: "एक के बदले एक" कोई गारंटी नहीं है। प्रोटोकॉल के दस्तावेज़ के अनुसार निकासी तय करते समय एक ऊपरी दर लागू होती है; कंसेंसस लेयर पर हुआ नुक़सान उस अवधि के इनाम से बड़ा हो तो तय होने वाली दर एक-के-बदले-एक से कम हो सकती है। क्रिप्टो में आपकी पूरी मूल राशि जा सकती है, और स्टेकिंग टोकन इसका अपवाद नहीं हैं।
भाव का फ़र्क़, कतार, और पैसे की ज़रूरत — तीनों साथ
फ़र्क़ एक प्रतिशत से कम हो तो सीधे बेच देना ही ठीक बैठता है। जिस चीज़ को छोड़ने का फ़ैसला हो चुका हो, उसे हफ़्तों हाथ में बँधा रखने का कोई फ़ायदा नहीं: कतार बीच में रद्द नहीं होती, और जगह दिखाने वाला टोकन किसी को देना हो तो उसमें फिर से भाव छोड़ना पड़ता है।
फ़र्क़ दो प्रतिशत से ऊपर हो और पक्का पता हो कि यह पैसा कुछ महीने नहीं चाहिए, तब कतार पर विचार बनता है। इतना गहरा डिस्काउंट आमतौर पर तब बनता है जब बाज़ार में घबराहट हो, और उस वक़्त इंतज़ार कर पाना अपने आप में एक बढ़त है, क्योंकि मजबूरी में बेचने वाले इंतज़ार नहीं कर सकते।
आख़िर में एक सवाल जो तकनीकी बातों से ज़्यादा काम का है: यह पैसा अगले तीन महीने में चाहिए या नहीं। चाहिए — तो कतार छोड़ दीजिए, डिस्काउंट चाहे कितना भी गहरा हो। नहीं चाहिए — तो यह सिर्फ़ एक गणित का सवाल है, ऊपर वाले सूत्र से हल कर लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या stETH को अब वापस ETH में बदला जा सकता है?
हाँ। अप्रैल 2023 के इथेरियम अपग्रेड से स्टेकिंग निकासी चालू हुई और उसके बाद Lido ने प्रोटोकॉल के भीतर निकासी शुरू कर दी। अब stETH प्रोटोकॉल के हिसाब वाले अनुपात से ETH में बदला जा सकता है, बस कतार में लगना पड़ता है।
कतार और सीधे बेचने में किससे ज़्यादा ETH मिलता है?
बाज़ार में डिस्काउंट हो तो कतार से ज़्यादा मिलता है, क्योंकि निकासी प्रोटोकॉल के हिसाब से होती है और उस दिन के भाव से नहीं — पर इंतज़ार करना पड़ता है। प्रीमियम हो या फ़र्क़ बहुत कम हो तो सीधे बेचना बेहतर है। तय करने का तरीक़ा यह है कि फ़र्क़ को इंतज़ार के दिनों के हिसाब से (चक्रवृद्धि) सालाना दर में बदलकर अपनी दूसरी संभावनाओं से तुलना कीजिए।
एक बार में कितना stETH निकाला जा सकता है?
Lido के निकासी-कतार कॉन्ट्रैक्ट के दस्तावेज़ के अनुसार एक रिक्वेस्ट कम से कम 100 wei और ज़्यादा से ज़्यादा 1,000 stETH की होती है; इससे ज़्यादा हो तो कई रिक्वेस्ट में तोड़नी पड़ती है। तोड़ने से कतार में आगे जगह नहीं मिलती, हर रिक्वेस्ट अपनी अलग जगह होती है।
इंतज़ार के दौरान क्या इनाम मिलता रहता है?
नहीं। रिक्वेस्ट भेजते ही टोकन कॉन्ट्रैक्ट में लॉक हो जाता है और उसके बाद नया स्टेकिंग इनाम नहीं जुड़ता। यह कतार की असली लागत का हिस्सा है, इसलिए दिनों के साथ छूटा हुआ इनाम भी गिनिए।