जोखिम और खाता

गिरवी रखे स्टेकिंग टोकन पर लिक्विडेशन: दूरी कैसे नापें

गिरवी रखे स्टेकिंग टोकन पर लिक्विडेशन: दोनों तरफ़ ETH होने पर भी छूट आने से दूरी घट जाती है
लूप की सुरक्षा एक ऐसी धारणा पर टिकी है जो टूट सकती है।

गिरवी और क़र्ज़ तभी तक एक ही चीज़ हैं जब तक स्टेकिंग टोकन पर छूट न आए। stETH के ETH के मुक़ाबले सस्ता होते ही गिरवी की तरफ़ मूल्य घटता है, क़र्ज़ वहीं रहता है, और लिक्विडेशन से आपकी दूरी सीधे सिकुड़ जाती है। यह ठीक उन्हीं दिनों होता है जब बाज़ार सबसे ज़्यादा उथल-पुथल में होता है।

यह बात लूप स्टेकिंग पर सबसे ज़्यादा लागू होती है। उसमें stETH गिरवी रखकर ETH उधार लिया जाता है, उस ETH से फिर stETH ख़रीदा जाता है, और उसे फिर गिरवी रखकर और उधार लिया जाता है। बिक्री का तर्क यह है कि स्टेकिंग की दर कई गुना हो जाती है — बशर्ते स्टेकिंग की कमाई ETH उधार की ब्याज दर से ऊपर रहे। यह आम लीवरेज से सुरक्षित भी लगता है, क्योंकि गिरवी और क़र्ज़ "एक ही चीज़" हैं: stETH चढ़े तो ETH भी चढ़ता है, गिरे तो साथ गिरता है। आम दिनों में यह तर्क सही है। दिक़्क़त उन कुछ असामान्य दिनों में है।

पहले लिक्विडेशन की रेखा निकाल लीजिए

उधारी प्रोटोकॉल एक अनुपात देखता है: आप पर कितना क़र्ज़ है, बँटा गिरवी के मूल्य से। यह अनुपात किसी सीमा से ऊपर जाते ही पोज़ीशन लिक्विडेट हो जाती है।

सीमा हर प्रोटोकॉल में अलग है, और एक ही प्रोटोकॉल में हर संपत्ति के लिए भी अलग, इसलिए अपने इस्तेमाल वाले पन्ने पर लिखा आँकड़ा ही लीजिए। यहाँ सिर्फ़ गणित है।

क्या निकालना हैकैसे
गिरवी का मूल्यटोकन की संख्या × टोकन का मौजूदा भाव
मौजूदा अनुपातक़र्ज़ ÷ गिरवी का मूल्य
ट्रिगर भावक़र्ज़ ÷ (टोकन की संख्या × लिक्विडेशन सीमा)
बची हुई दूरी(भाव − ट्रिगर भाव) ÷ भाव

तालिका में "भाव" का मतलब हर जगह वही है जो प्रोटोकॉल मूल्य आँकने के लिए इस्तेमाल करता है, और वह ETH में है। आख़िरी पंक्ति बताती है कि वह भाव और कितना गिर सकता है, बशर्ते गिरवी एक ही तरह की हो, क़र्ज़ ETH में हो और सीमा न बदले। साइट का टूल यही निकालता है: चार संख्याएँ भरिए और नतीजा सामने।

वे चार संख्याएँ आती कहाँ से हैं

पहली दो आप ख़ुद जानते हैं: कितने टोकन गिरवी रखे और कितना उधार लिया। मुश्किल बाक़ी दो में है: "प्रोटोकॉल का भाव" और "लिक्विडेशन सीमा"। ये अंदाज़े से नहीं भरे जा सकते, और किसी भाव-साइट से बाज़ार भाव उठा लेना भी काम नहीं आता।

प्रोटोकॉल के बाज़ार वाले पन्ने पर उस संपत्ति का विवरण खोलिए। ये बाज़ार-स्तर के सार्वजनिक मानक हैं, इसलिए वॉलेट जोड़े बिना भी दिखते हैं। वहाँ से तीन क़दम में काम हो जाता है:

  1. अपनी गिरवी संपत्ति का ऑरेकल भाव लिखिए (डॉलर में)।
  2. WETH का ऑरेकल भाव भी वहीं से लिखिए।
  3. दोनों को भाग दीजिए। गिरवी का भाव बँटा WETH का भाव ही वह "ETH में भाव" है जो टूल माँगता है।

लिक्विडेशन सीमा उसी पन्ने पर नीचे मिलती है। साथ में एक और आँकड़ा होता है जो बताता है कि ज़्यादा से ज़्यादा कितना उधार लिया जा सकता है। वह लिक्विडेशन की रेखा नहीं है, दोनों को मिलाइए मत।

कुछ प्रोटोकॉल में ETH-जैसी संपत्तियों के लिए एक अलग मोड होता है जिसमें सीमा बिलकुल दूसरी होती है — उदाहरण के लिए, सितंबर 2026 में Aave पर wstETH की सामान्य सीमा 81% और इस मोड में 95% दिखी। लूप वाली पोज़ीशन में यह फ़र्क़ बहुत मायने रखता है, इसलिए भरने से पहले पक्का कीजिए कि आप किस मोड में हैं। यह एक संख्या ग़लत भरी, तो पूरा नतीजा झूठा है।

आपका प्रोटोकॉल कोई और हो तो भी ढूँढ़नी वही दो चीज़ें हैं: वह भाव जिससे प्रोटोकॉल ख़ुद मूल्य आँकता है (ट्रेडिंग पन्ने का भाव नहीं), और उस बाज़ार में उस संपत्ति की लिक्विडेशन सीमा। न मिलें तो बाज़ार भाव भरकर निकला नतीजा "मान लीजिए ऐसा हो" वाला परिदृश्य है, आपके खाते की असली रेखा नहीं।

"एक ही चीज़" वाली धारणा टूटती कहाँ है

क्योंकि गिरवी टोकन है और क़र्ज़ ETH, और प्रोटोकॉल उस संपत्ति के ऑरेकल भाव से मूल्य आँकता है। वह भाव बाज़ार भाव देख सकता है, निकासी दर देख सकता है, या कोई सीमित करने वाली व्यवस्था। यह मान लेना ग़लत है कि हर बाज़ार एक ही तरीक़ा अपनाता है।

अगर प्रोटोकॉल का भाव बाज़ार की छूट को दर्शाता है तो गिरवी की तरफ़ मूल्य घटेगा, जबकि आपका क़र्ज़ एक ETH का एक ETH ही रहेगा, यानी अनुपात ऊपर चढ़ जाएगा। और अगर वह भाव बाज़ार के साथ नहीं हिलता, तो स्वास्थ्य-अनुपात में गिरावट कुछ देर तक दिखेगी ही नहीं; इसका मतलब यह नहीं कि बेचने पर नुक़सान नहीं होगा।

इससे भी बुरा यह है कि छूट और लिक्विडेशन एक-दूसरे को खिलाते हैं। कोई लिक्विडेट होता है, लिक्विडेट करने वाला गिरवी बेचकर ETH बनाता है, उस बिकवाली से छूट और गहरी होती है; छूट गहरी होते ही अगली क़तार का अनुपात बिगड़ता है और वे भी कटते हैं। 2022 की stETH छूट की असली मार इसी परत पर थी।

लूप की परतें जितनी ज़्यादा, सह सकने वाली छूट उतनी पतली। दो-तीन परतों के बाद कुछ ही प्रतिशत की गुंजाइश बचती है — और 2022 में stETH एक बार 0.93 से 0.95 के दायरे में चला गया था। जिन पोज़ीशनों की गुंजाइश इससे कम है, वे उस स्तर की छूट में लिक्विडेशन की रेखा छू लेती हैं।

चार जगहें जहाँ हिसाब ग़लत बैठता है

  1. प्रोटोकॉल का असली भाव नहीं मिलाया। बाज़ार भाव भरें या 1:1 की निकासी दर, अगर वह प्रोटोकॉल के अपनाए भाव से अलग है तो दूरी ग़लत निकलेगी। पहले उस बाज़ार का ऑरेकल और संपत्ति सेटिंग देखिए; सिर्फ़ बाज़ार भाव से गिनें तो उसे "दबाव वाला परिदृश्य" कहिए, खाते की मौजूदा रेखा नहीं।
  2. यह मान लिया कि लिक्विडेशन से पहले निकासी हो जाएगी। निकासी में कई दिन लग सकते हैं, लिक्विडेशन मिनटों में हो जाता है। क़र्ज़ घटाना हो तो बाहर से ETH लाकर चुकाइए, या देखिए कि प्रोटोकॉल गिरवी से सीधे चुकाने की सुविधा देता है या नहीं।
  3. ब्याज बढ़ रहा है, यह भूल गए। क़र्ज़ वाली तरफ़ स्थिर नहीं है, वह रोज़ थोड़ा बढ़ती है। बाज़ार तंग होने पर ब्याज दर उछल भी सकती है, क्योंकि तब सब एक ही संपत्ति उधार ले रहे होते हैं। तीन महीने पहले निकाली हुई दूरी आज वह नहीं रही।
  4. सिर्फ़ एक संपत्ति का भाव देखा। गिरवी में एक से ज़्यादा तरह के टोकन हों तो वे न एक साथ गिरेंगे, न एक जितना। अलग-अलग गिनिए, औसत मत लीजिए।

लूप स्टेकिंग में लिक्विडेशन से गुंजाइश कैसे रखें

कोई तय जवाब नहीं है, पर कुछ दिशाएँ हैं।

सबसे बुरे दिन को कसौटी बनाइए। टोकन का भाव किसी साफ़ छूट वाले स्तर पर रखकर देखिए कि आपका अनुपात क्या बनता है। अगर उस हालत में आप कट जाते हैं तो आपका लीवरेज अभी ही ज़्यादा है — "शायद ज़्यादा" नहीं, है।

ब्याज की बढ़त जोड़कर देखिए। आज की संख्या पर मत रुकिए; तीन और छह महीने आगे बढ़ाकर देखिए कि क़र्ज़ कितना हो जाएगा, और उसी से दूरी दोबारा निकालिए।

चुकाने लायक़ रक़म कहीं तैयार रखिए। वह ऐसी जगह हो जहाँ से मिनटों में निकल सके, किसी कतार वाली जगह पर नहीं। उसका होना ही अपने आप में बीमा है।

एक परत कम, जोखिम बहुत कम। तीसरी परत के बाद अतिरिक्त कमाई बहुत कम बचती है जबकि अतिरिक्त जोखिम तेज़ी से चढ़ता है। "अभी तक तो कुछ हुआ नहीं" परत बढ़ाने की कोई वजह नहीं है।

एक ठोस उदाहरण

संख्याओं के साथ चलना ज़्यादा साफ़ रहता है। नीचे के आँकड़े मान लिए गए हैं, किसी प्रोटोकॉल के असली मानक नहीं हैं। अपने आँकड़े अपने पन्ने से ही लीजिए।

मान लीजिए आपके पास 100 stETH हैं, उन्हें गिरवी रखकर 60 ETH उधार लिए, और लिक्विडेशन सीमा 85% है। प्रोटोकॉल का भाव 0.999 ETH है।

  • गिरवी का मूल्य = 100 × 0.999 = 99.9 ETH
  • मौजूदा अनुपात = 60 ÷ 99.9 = 60.1%
  • ट्रिगर भाव = 60 ÷ (100 × 0.85) = 0.706
  • बची दूरी = (0.999 − 0.706) ÷ 0.999 ≈ 29.3%

अब एक ज़्यादा लीवरेज वाली पोज़ीशन: गिरवी 400 stETH, क़र्ज़ 300 ETH, भाव और सीमा वही। ब्याज और लेन-देन की लागत अभी नहीं गिन रहे।

  • गिरवी का मूल्य = 400 × 0.999 = 399.6 ETH
  • मौजूदा अनुपात = 300 ÷ 399.6 ≈ 75.1%
  • ट्रिगर भाव = 300 ÷ (400 × 0.85) ≈ 0.882 ETH
  • बची दूरी = (0.999 − 0.882) ÷ 0.999 ≈ 11.7%

दोनों की गुंजाइश क्रमशः लगभग 29.3% और 11.7% है। क़र्ज़ गिरवी के मुक़ाबले जितना ऊँचा, भाव गिरने की जगह उतनी कम। हर नई उधारी के बाद कुल गिरवी और कुल क़र्ज़ दोबारा गिनिए — सिर्फ़ परतें गिनकर काम नहीं चलता, क्योंकि हर बार उधार की रक़म, भाव और ब्याज अलग होते हैं।

लूप पोज़ीशन से लीवरेज घटाकर कैसे निकलें

लीवरेज घटाना हो तो पहले देखिए कि इस वक़्त कितनी गिरवी वापस ली जा सकती है, और हर क़दम के बाद स्वास्थ्य-अनुपात क्या रहेगा।

अगर गिरवी अब भी उधारी को सँभाल रही है तो उसे मनमर्ज़ी निकालकर बेचा नहीं जा सकता। बाहर से ETH लाकर कुछ क़र्ज़ चुकाइए, फिर जितनी गिरवी प्रोटोकॉल निकालने देता है उतनी लीजिए; इंटरफ़ेस "गिरवी से ही चुका दीजिए" वाला रास्ता देता हो तो उसका मार्ग, फ़ीस और स्लिपेज की सीमा जाँच लीजिए।

एक ही खाते में हिसाब आमतौर पर कुल गिरवी और कुल क़र्ज़ पर होता है। कोई अलग से हटा लेने लायक़ "सबसे बाहरी परत" नहीं होती। काग़ज़ पर गिनी हुई परतों को प्रोटोकॉल की निकासी का क्रम मत मान लीजिए।

अगर कुछ हिस्सा लिक्विडेट हो चुका है: लिक्विडेशन वापस नहीं होता। प्रोटोकॉल के इंटरफ़ेस पर लेन-देन का रिकॉर्ड देखिए कि कितनी गिरवी गई और कितना क़र्ज़ बचा, बची पोज़ीशन की दूरी टूल से दोबारा निकालिए, फिर तय कीजिए कि गिरवी बढ़ानी है, कुछ चुकाना है या पूरा बंद करना है।

खोलना हो तो जल्दी खोलिए। लिक्विडेशन की कगार पर पहुँचकर मत खोलिए, क्योंकि उस वक़्त छूट सबसे गहरी होती है, चेन सबसे व्यस्त, और आपका हर लेन-देन सबसे ख़राब भाव पर लगता है। लीवरेज घटाना है तो बाज़ार के शांत रहते घटाइए।

हेल्थ फ़ैक्टर के अलावा कौन सी संख्या देखें

ज़्यादातर उधारी प्रोटोकॉल एक "स्वास्थ्य" जैसा सूचक देते हैं। वह काम का है, पर वह यह बताता है कि "अभी सुरक्षित हैं या नहीं" — यह नहीं कि "और कितना सह सकते हैं"।

मेरी सलाह है कि एक और संख्या अलग से लिख रखिए: टोकन पर और कितने प्रतिशत छूट आने पर सीमा छू जाएगी। इसका फ़ायदा यह है कि इकाई सीधी है। आप उसे इतिहास की छूट की गहराई से मिलाकर ख़ुद से पूछ सकते हैं कि "उस स्तर की बात दोबारा हुई तो मैं टिकूँगा?"

एक ही गिरवी, एक ही तरह के क़र्ज़ और स्थिर सीमा के साथ यह दूरी असल में 1 − 1÷स्वास्थ्य के बराबर बैठती है। जैसे स्वास्थ्य 1.4 का मतलब लगभग 28.6% की गुंजाइश। कई संपत्तियों वाली पोज़ीशन पर यह सीधा नियम लागू नहीं होता।

एक और ट्रिगर: मानक बदलना

उधारी प्रोटोकॉल अपने मानक बदलते रहते हैं। लिक्विडेशन सीमा, उधारी की हद और ब्याज का ढाँचा — ये सब शासन-निर्णय से बदल सकते हैं। आपकी पोज़ीशन में कुछ न बदले, फिर भी सुरक्षित दूरी अचानक घट सकती है।

यह जोखिम-प्रबंधन का सामान्य क़दम है। पर मतलब यह है कि आपकी निकाली हुई दूरी के पीछे एक अनदेखी शर्त है: मानक नहीं बदलेंगे। इसे याद रखिए और गुंजाइश को बिलकुल किनारे तक मत इस्तेमाल कीजिए।

कमाई सीधी रेखा में बढ़ती है, जोखिम नहीं

लूप स्टेकिंग में हर नई परत पिछली से कम अतिरिक्त कमाई देती है, जबकि सह सकने वाली छूट की जगह तेज़ी से घटती है — ऊपर के दो उदाहरणों में यही 29.3% और 11.7% का अंतर है। मेरी नज़र में यह सौदा घाटे का है।

इससे भी बुनियादी बात यह है कि यह रणनीति माँगती है कि बाज़ार के सबसे अस्त-व्यस्त क्षण में आप सही और तेज़ प्रतिक्रिया दें। जो रणनीति "उस वक़्त सँभाल लेंगे" पर टिकी हो, उसे रणनीति कहना मुश्किल है।

फिर भी करना ही हो तो उस छूट वाली संख्या को लिखकर सामने चिपका दीजिए। अनुपात या स्वास्थ्य नहीं, बल्कि यह कि "टोकन और कितने प्रतिशत गिरा तो पोज़ीशन ख़त्म"। वह संख्या किसी भी डैशबोर्ड से ज़्यादा सीधी है, और वही आपको अपनी पोज़ीशन के बारे में ईमानदार रखती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गिरवी और क़र्ज़ दोनों ETH से जुड़े हैं, फिर लिक्विडेशन क्यों?

गिरवी स्टेकिंग टोकन है और क़र्ज़ ETH है, और प्रोटोकॉल उस संपत्ति के ऑरेकल भाव से मूल्य आँकता है। अगर वह भाव टोकन की ETH के मुक़ाबले छूट को दर्शाता है तो गिरवी की तरफ़ मूल्य घटता है जबकि क़र्ज़ वही रहता है — अनुपात लिक्विडेशन की सीमा की ओर बढ़ जाता है। ऑरेकल हमेशा बाज़ार भाव का पीछा नहीं करता, इसलिए असली संपत्ति सेटिंग देखनी पड़ती है।

लिक्विडेशन से पहले निकासी करके बचा जा सकता है?

इस पर भरोसा मत कीजिए। निकासी में कई दिन या उससे ज़्यादा लग सकते हैं जबकि लिक्विडेशन बहुत जल्दी हो जाता है। क़र्ज़ घटाने के लिए बाहर से ETH लाकर कुछ हिस्सा चुकाया जा सकता है, या देखिए कि प्रोटोकॉल गिरवी से सीधे चुकाने की सुविधा देता है या नहीं; बेचना पड़े तो उस वक़्त का भाव-फ़र्क़ और फ़ीस भी जुड़ती है।

अपनी बची हुई दूरी कैसे निकालें?

प्रोटोकॉल जिस भाव से मूल्य आँकता है उसी से: (भाव − ट्रिगर भाव) ÷ भाव। ट्रिगर भाव = क़र्ज़ ÷ (टोकन की संख्या × लिक्विडेशन सीमा)। यह एक ही गिरवी, ETH में क़र्ज़ और सीमा स्थिर होने पर लागू है; बढ़ते ब्याज का असर अलग से आँकना होगा।

लूप बनाने पर जोखिम कितना बढ़ता है?

कमाई सीधी रेखा में बढ़ती है, जोखिम नहीं। हर नई परत की अतिरिक्त कमाई पिछली से कम होती है, जबकि सह सकने वाली छूट की जगह तेज़ी से घटती है। दो-तीन परतों के बाद कुछ ही प्रतिशत की गुंजाइश बचती है — और 2022 में stETH एक बार 0.93–0.95 के दायरे में गया था।

लिक्विडेशन एक के बाद एक क्यों होते हैं?

क्योंकि ये पोज़ीशन एक जैसी बनी होती हैं — वही गिरवी, वही क़र्ज़, मिलता-जुलता लीवरेज, इसलिए इनकी लिक्विडेशन रेखाएँ भी लगभग एक ही जगह होती हैं। भाव उस दायरे में आते ही कई लोग एक साथ कटते हैं; लिक्विडेट करने वाले गिरवी बेचकर ETH बनाते हैं, उस बिकवाली से छूट और गहरी होती है, और अगली क़तार की दूरी कम पड़ जाती है।